हरी हरी दूब पर कविता - अटल बिहारी वाजपेयी प्रकृति (Nature) और जीवन के यथार्थ का एक अद्भुत काव्य-संगम... अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध प्रकृति कविता - 'हरी-हरी दूब पर' लेखक/संपादक: हर्ष नाथ झा (Founder & Editor-in-Chief, Sahityashala) स्रोत (Source): अटल बिहारी वाजपेयी रचनावली भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रख्यात वक्ता और हिंदी के कालजयी कवि अटल बिहारी वाजपेयी की लेखनी में हमेशा एक दार्शनिक गहराई रही है। जब हम इंटरनेट पर Nature Poems in Hindi (प्रकृति पर हिंदी कविताएँ) खोजते हैं, तो उनकी प्रसिद्ध रचना 'हरी हरी दूब पर' अनायास ही ध्यान खींच लेती है। यह मात्र एक कविता नहीं है, बल्कि सुबह की घास (दूब) पर पड़ी एक छोटी सी 'ओस की बूंद' के माध्यम से जीवन की क्षणभंगुरता (Fragility of life) का दस्तावेज़ है। यह कविता Atal Bihari Vajpayee poems in Hindi के उस विशेष संग्रह का हिस्सा है जो हमें प्रकृति के साथ-साथ वर्तमान में जीने की कला सिखाती है। आइए, साहित्यशाला के इस अंक में पढ़ें इस कवि...
Last Updated: November 2025 Table of Contents: 1. Introduction 2. Full Lyrics (Krishna-Arjun Samvad) 3. Watch Video Performance 4. Literary Analysis (Sahitya Vishleshan) महाभारत पर रोंगटे खड़े कर देने वाली कविता Mahabharata Poem On Arjuna by Amit Sharma Visual representation of the epic dialogue between Krishna and Arjuna. This is one of the most requested Inspirational Hindi Poems based on the epic conversation between Lord Krishna and Arjuna. Explore our Best Hindi Poetry Collection for more Veer Ras Kavitayein. तलवार, धनुष और पैदल सैनिक कुरुक्षेत्र में खड़े हुए, रक्त पिपासु महारथी इक दूजे सम्मुख अड़े हुए | कई लाख सेना के सम्मुख पांडव पाँच बिचारे थे, एक तरफ थे योद्धा सब, एक तरफ समय के मारे थे | महा-समर की प्रतिक्षा में सारे ताक रहे थे जी, और पार्थ के रथ को केशव स्वयं हाँक रहे थे जी || रणभूमि के सभी नजारे देखन में कुछ खास लगे, माधव ने अर्जुन को देखा, अर्जुन उन्हें उदास लगे | ...